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शनिवार, 20 मार्च 2021

कुंडलिनी ऊर्जा

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( पुनर्प्रेषित )
बीज मन्त्र 
बीज मन्त्रों की रचना में वैज्ञानिक आधार है | विशेष ध्वनी का शरीर के विशेष आंतरिक अंगों पर विशेष प्रभाव होता है | ख़ास  अक्षरों कि विशेषता है की उनके निरंतर जाप से आपके भाव भी बदल सकते हैं |आप किसी ख़ास अक्षर  या शब्द को निरंतर जपते हैं तो आपमें क्रोध उत्पन्न हो सकता है , आपमें प्रेम उत्पन्न हो सकता है , भय उत्पन्न हो सकता है , घृणा उत्पन्न हो सकता है | मैं सिर्फ ख्याली बातें नहीं करता आप प्रयोग कर के देख सकते है | एक प्रयोग बताता हूँ “ रं ” अग्नि बीज है | इसका निरंतर जाप आपमें उर्जा उत्पन्न कर देगा मणिपुर चक्र को सक्रीय कर देगा | इस बीज के जाप से आपके अंदर अतिशय  क्रोध उत्पन्न हो सकता है | इसलिए इस बीज के जाप के समय ध्यान अत्यंत आवश्यक है ध्यान  को दो जगहों पर केन्द्रित करना पड़ता है प्रारम्भ में एक दो मिनट आज्ञा चक्र (दोनों भौं के मध्य ) पर पुन : उसके बाद निरंतर मणिपुर चक्र (नाभि से एक दो अंगुल निचे ) पर | अगर आप ध्यान के साथ इस अग्नि बीज का जाप करते हैं तो कोई दुष्प्रभाव नहीं होगा और आप अत्यंत उर्जा का अनुभव करेंगे | ( रं अग्नि बीज के जाप के समय ब्रह्मचर्य रहना आवश्यक है )
एक मन्त्र है “ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ” | इस मन्त्र के जाप करने पर आप अपने  अंदर प्रेम के भाव की गहनता मह्शूश कर सकते हैं | इस मन्त्र के जाप के समय अपना ध्यान हृदय यानी अनाहत चक्र (छाती के दोनों पसलियों के मध्य ) के पास लगाना पड़ता है | 
ये कुछ उदाहरण मैंने रखा बीज मन्त्रों की महता एवं प्रयोग के सम्बन्ध में | हर बीज मन्त्र का अपना ऊर्जा है वह विशेष रूप से कार्य करता है | शिव सारे मन्त्रों के स्रष्टा हैं भगवान भोले नाथ हम प्राणियों पर दया कर इन मन्त्रों का प्रसाद हमें दिया है | हमें शिव के इस प्रसाद से अवश्य लाभान्वित होना चाहिए |
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आज एक पुराना पोस्ट हीं पोस्ट कर रहा हूँ  इसे पहले भी पोस्ट किया था । 
और विशेष कुछ अभी कहने को नहीं है , थोड़ी आर्थिक समस्या से जूझ रहा हूँ । एक बात तो सही है  यह मेरा व्यक्तिगत अनुभव है अगर आप अध्यात्मिक संपदा से पूर्ण हैं तो ईश्वर थोडा आर्थिक  मामले में परीक्षा लेता है 🙂 और अगर आर्थिक रूप से सम्पन्न हैं तो अध्यात्मिक संपदा की कमी होगी । आपका अनुभव क्या कहता है अवश्य टिप्पणी करें । दोनों रूप से  दृष्टि सम्पन्न लोग भी होते हैं किन्तु वे विरले हीं मिलते हैं । 
ॐ ॐ ॐ 
सभी सुखी हों । सभी का ध्यान में गति हो ।
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शुक्रवार, 19 मार्च 2021

मन्त्र जप और मन्त्र सिद्धि

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परम श्रद्धेय ब्रह्मलीन गुरुदेव पण्डित अरुण कुमार शर्मा काशी की अध्यात्म-ज्ञानधारा में पावन अवगाहन

पूज्य गुरुदेव के श्रीचरणों में कोटि-कोटि नमन

      मन्त्र के बार-बार जपने से उसका प्रभाव होता है। मन्त्र शब्द के कम्पन से प्रकम्पित होकर मनुष्य के कोष उसके अनुकूल हो जाते हैं। जो कोष अनुकूल होते हैं, उनसे सम्बंधित विषय का बोध मनुष्य को स्वयं अपने आप होने लगता है। 
       मन्त्र का कार्य श्रद्धा पर आधारित है। मन्त्रों की क्रिया उनके उच्चारण पर निर्भर है।  मंत्रोच्चारण उनके अर्थ पर निर्भर होते हैं।
       मन्त्र के उच्चारण से जो कम्पन पैदा होता है, पहले कुछ समय तक वह वायु में रह कर धीरे-धीरे उसी में विलीन हो जाता है। लेकिन मन्त्र-जप की संख्या जब अधिक हो जाती है तो उसके कम्पन वायु की पर्तों  का भेदन कर सूक्ष्मतम वायु मंडल में चले जाते हैं और वहां से उस देवता का आकार-प्रकार बनाने लग जाते हैं जिस देवता का वह मन्त्र होता है। इसीलिए  मन्त्र-जप की संख्या निश्चित होती है। उस संख्या से जब अधिक जप होता है तभी सूक्ष्मतम वायुमंडल में देवता का आकार-प्रकार बनता है। जब वह पूर्णरूप से बन जाता है तो देवता अपने लोक से आकर उसमें स्वयं प्रतिष्ठित होते हैं। आकार-प्रकार का बनना मन्त्र-चैतन्य का लक्षण है। देवता का अपने आकार-प्रकार में प्रतिष्ठित होना ही मन्त्र-सिद्धि है। मन्त्र सिद्ध होने पर सम्बंधित देवता मन्त्र जपने वाले को उसका फल प्रदान करते हैं। 

-----:ॐ का सही उच्चारण:-----
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      सही ढंग से जो ॐ का उच्चारण करना जानता है ,उसके जैसा कोई साधक नहीं होता। ॐ के उच्चारण में श्वास-प्रश्वास के लय और उसकी गति को समझना आवश्यक है। ॐ का उच्चारण कई प्रकार से किया जाता है। प्रत्येक उच्चारण के स्वर एक दूसरे से भिन्न होते हैं और उनके प्रभाव भी भिन्न होते हैं। भिन्न-भिन्न प्रभाव से तत्काल वातावरण में परिवर्तन होता है।
       ॐ की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि शंख के माध्यम से निकली हुई ॐ की ध्वनि अति विचित्र और महत्व्पूर्ण होती है। इसलिए कि वह देवलोक और उसके ऊपर के लोकों तक सुनाई देती है। देवगण उसको सुनकर चमत्कृत होते हैं और होते हैं प्रसन्न।
       यह तो निश्चित है कि ॐ के उच्चारण की भिन्नता के कारण उसका फल भी भिन्न-भिन्न होता है। "ओ" पर चौगुना ज़ोर देकर दीर्घकाल तक उसका उच्चारण करने के बाद "म" का उच्चारण भी दीर्घकाल तक करना चाहिए। जितना समय ओ के उच्चारण में लगे, उतना ही समय म के उच्चारण में भी लगना चाहिए। ऐसा "म" अत्यधिक शक्तिशाली होता है। ऐसे ॐ के उच्चारण का प्रभाव उच्चारण करने वाले व्यक्ति के मन, मस्तिष्क और आत्मा पर तुरंत पड़ता है। इसके अतिरिक्त अदृश्य रूप से वातावरण में विद्यमान अपआत्माएं ( भूत-प्रेत) भी भाग जाती हैंऔर अच्छी आत्माएं आकर्षित होकर वहां आ जाती हैं और शंख बजाने वाले की सहायता करती हैं मानसिक रूप से। sabhar shivram Tiwari Facebook wall

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सोमवार, 8 मार्च 2021

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रविवार, 28 फ़रवरी 2021

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गुरुवार, 25 फ़रवरी 2021

Smart Plug 16Amp कम ज़्यादा वोल्टेज कटआउट सर्ज प्रोटेक्टर

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हाई लो वोल्टेज कटआउट - एक आवश्यक और किफायती सुरक्षा उपकरण जो इलेक्ट्रॉनिक गैजेट को वोल्टेज के उतार-चढ़ाव से सुरक्षा प्रदान करती है. यह डिवाइस वॉशिंग मशीन, माइक्रोवेव, AC, 1 Ph, 1HP पानी के पंप तक उत्तम है. स्‍मार्ट प्‍लग को दीवार के पॉवर सॉकेट में लगाएं. अपने उपकरण के पॉवर पिन को स्‍मार्ट प्‍लग में लगाएं. बिजली का स्विच ऑन करें और फ़िक्र करना छोड़ दें.....24 X 7 X 365 स्वचालित रूप में खराब बिजली के उतार-चढ़ाव को पहचान लेता है और उपकरण तक आने वाली बिजली को काट देता है. वोल्टेज सामान्य हो जाने पर स्वचालित रूप से बिजली को चालू करता है. एर्गोनोमिक डिजाइन. हरेक प्रकार की सजावट के लिए उत्तम है. इसका डिज़ाइन उपयोगी है. इसे हाउसवाइफ ठीक कर सकती हैं. इंस्टॉलेशन के लिए किसी ख़ास योग्यता की आवश्यकता नहीं. ›

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मंगलवार, 16 फ़रवरी 2021

vigyan kee takneek: जीवन प्रत्याशा में हर साल 3 महीने की वृद्धि हो रही है

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vigyan kee takneek: जीवन प्रत्याशा में हर साल 3 महीने की वृद्धि हो रही है: ब्रिटेन की एक बैग यह प्रसिद्ध वैज्ञानिक का दावा है कि जीवन का 150 वां बसंत देखने वाला आदमी तो पहले ही जन्म ले चुका है लेकिन यह तो कुछ भी नही...

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vigyan kee takneek: नारमन इ बोरलाग

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vigyan kee takneek: नारमन इ बोरलाग: नारमन इ बोरलाग एक ऐसे ब्यक्ति का नाम है जो जीवन पर्यंत मानव जाती के लिए भूख से लड़ता रहा इस ऋषि को भारत सहित दुनिया के अनेक देश के लोग इन...

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